पागल कुत्ता, बंदर, बिल्ली, लोमड़ी, गीदड़, लँगूर, साँप, बिच्छु, आदि सभी तरह के ज़हरीले जानवरों के नए व

रविवार, 10 जनवरी 2016

केवल कुत्ते के काटने से ही रैबीज. नहीं हौता

आमतौर पर मरीज़ एवं परिजन केवल कुत्ते के काटने के बाद ही रेबीज़ के टीके लगवाते हैं, जबकि रेबीज़का प्राणघातक वायरस चूहे से लेकर हाथी तक हर स्तनपायी जानवर के काटने पर फैल सकता है।
कौन-कौन से प्राणी :मनुष्य समेत सभी स्तनपायी जानवरों के शरीर में रेबीज़ का वायरस प्रवेश कर बीमारी पैदा कर सकता है।
ज्यादातर कुत्तों में :रेबीज़ के मरीज़ों में से 75 प्रतिशत को यह बीमारी कुत्तों के काटने से होती है। इसका कारणभारत एवं एशियाई देशों में इनका अनियंत्रित रूप से बढ़ना है। सड़क पर पलने वाले आवारा कुत्तों के शरीर में वायरस के प्रवेश करने के बाद इनकी लार में भी आ जाता है। ऐसा कुत्ते द्वारा किसी को काटे जाने पर वह व्यक्ति संक्रमण से ग्रसित हो जाता है।
किसके काटने से होता रेबीज़ : देश में रेबीज़ कुत्ते के अलावा बंदर, बिल्ली, सूअर, सियार एवं भेड़िए के काटने के बाद देखा गयाहै। सामान्यतः हर जंगली जानवर के काटने के बाद व्यक्ति को रेबीज़ ग्रसित ही माना जाता है। उसे रेबीज़ के खिलाफ अनिवार्य रूप से टीका लगाना चाहिए।संक्रमित जानवर द्वारा काटने के बाद : मनुष्य के शरीर में प्रवेश करने के बाद काफी लंबे समय तक यह वायरस गुप्तावस्था में रहता है। यह समय ४ दिन से लेकर कभी-कभी १०-१२ वर्ष तक का हो सकता है। इसी कारण कई बार मरीज़ जानवर से काटेजाने की बात भूल ही जाते हैं।
रेबीज़ ग्रसित जानवर के लक्षण : रेबीज़ ग्रसित प्राणी अनायास ही उत्तेजित होकर ज़रा-सी बात में ही काटने एवं भागने लगता है। बिना किसी उत्प्रेरणा के दूर से आकर के बुरी तरह भटक जाता है, बुरी तरह काटता है, लार बहाता हुआ यहाँ से वहाँ भटकता है। संक्रमित जानवर कई लोगों को काटता है एवं कुछ ही समय में उसकी मृत्यु हो जाती है।
इंसानों में लक्षण : लक्षण लगभग जानवरों की तरह ही होते हैं। यह वायरल बुखार की तरह ही होते हैं। दो-तीन दिन के बुखार के बाद सिरदर्द एवं शरीर दर्द के बाद गले में खराश हो जाती है। फिर पानी पीने में दिक्कत आने लगती है और पानी पीने से डर लगने लगता है। ऐसी स्थिति में आने तक व्यक्ति वायरस से पूरी तरह ग्रसित हो चुका होता है। इसी के साथ उसे पानी का डर यानी "हायड्रोफोबिया" भी हो जाता है, जिसके कारण मरीज़ को पानी देखने पर ही डर लगने लगता है। १५ प्रतिशत को वायरल बुखार होने के बाद लकवा हो सकता है। मरीज़ पर कोई भी दवा असर नहीं करती और उसकी मृत्यु हो जाती है।बचाव :एक बार होने के बाद १०० प्रतिशत मृत्यु का कारण बनने वाली इस बीमारी को फैलने से पूरी तरह रोका जा सकता है। घाव की सही देखभाल अत्यंत आवश्यक है। सबसे पहले घाव को अच्छी तरह धोएँ, फिर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेकर टीके लगवाएँ।
टीके दो प्रकार के होते हैं : सर्वप्रथम वायरस को घाव की जगह ही निष्क्रिय करने के लिए सीरम लगवाना चाहिए, जो कि घाव को तुरंत नष्ट करता है। साथ ही पाँच इंजेक्शन का टीके का कोर्स शुरू करना चाहिए, ताकि शरीर में वायरस के फैलने को पूरी तरह से रोका जा सके
या फिर हमसे मिलें हमारे यहां
पागल व साधारण कुत्ता बन्दर साँप बिल्ली सियार घोड़ा लोमड़ी ऊँट नेवला लंगूर गीदड़ डिंगारे छिपकली ऊदबिलाउ मेंढक गिलहरी चूहा भेड़िया रीछ बिच्छू बाज़ गिद्ध चील उल्लू आदि के इंसानों व पालतू जानवरों के नये-पुराने काटे हुवे का ईलाज निःशुल्क होता है कोई पैसा या कोई फ़ीस नहीँ ली जाती है ये हमारी एकदम फ़्री सेवा है मरीज़ की कमर पर काशी की थाली पढ़कर लगाई जाती है अगर शरीर में ज़हर होता हे तो थाली कमर पे चुम्बक की तरह चिपक जाती हे और तब तक नही हटती जब तक शरीर से सारा ज़हर न चूस ले थाली से सारा ज़हर एक बार में ही निकल जाता है ओर मरीज़ पूरी तरह से बिल्कुल ठीक हो जाता है ! ये 100 % प्रतिशत गारन्टी का पेटेन्ट ईलाज है। दुबारा आने की ज़रूरत नहीं पड़ती!
मगर थाली लगवाने के लिये आपको हमारे पास आना पड़ेगा अगर नहीं आ सकते तो घबराने की कोई बात नहीं आप हमसे थाली पढ़वाकर किसी भी देश, या राज्य में डाक दुवारा या कोरियर से भी मंगवा सकते हें आपको केवल थाली व कोरियर आदि का ही ख़र्चा देना पड़ेगा और कोई पैसा नहीँ देना होगा थाली आपको पढ़कर भेज दी जायेगी उसे आप ख़ुद अपनी नंगी कमर पर लगा सकते हें। थाली किसी भी समय दिन या रात को लगा सकते हें। कोई बन्धन नहीँ है।
थाली लगाने का तरीक़ा ये हे पहले आप अपनी कमर को नंगा करलें फिर किसी कुर्सी, मेज़ या चारपाई पर अपने दोनों पैर लटकाकर बैठ जायें और फिर अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और थोड़ा नीचे झुक जायें अब कमर पे सबसे ऊपर की तरफ़ थाली को बिस्मिल्लाह पढ़कर लगाएं और 5 मिनट तक पकड़े रहें ताकी उसे अर्थ मिल जाये और वो गिर न पाये अब थाली को छोड़ दें और देखें की थाली कमर पर चिपकी है या नहीँ अगर हाँ तो धीरे-धीरे कमर को हल्का सा सीधा करें बिलकुल सीधा न हों वर्ना थाली नीचे गिर जायेगी अब आराम से बैठे रहें और जब तक थाली लगे लगायें ज़्यादा हिले-जुले नहीँ थाली गिर ने पर फिर इसी प्रकार से दुबारा लगायें बार-बार गिरने पर ना लगायें क्योंकि अब थाली नहीँ लगेगी आपका ज़हर ख़त्म हो गया है। इसीलिए थाली बार-बार गिर रही है ज़हर ख़त्म होने की यही पहचान है।
हमारी थाली शरीर में ज़हर के कम वे ज़्यादा होने के हिसाब से ही कमर पर चिपकती है आपके शरीर में ज़हर की जितनी अधिक मात्रा होगी ये उतना ही देर तक कमर पे चिपकी रहेगी इसकी कोई लिमिट नहीँ 10 मिन्ट से लेकर 10 घण्टा भी लग सकती है। ज़हर नहीँ होगा तो थाली आपकी कमर पे नहीँ लगेगी
कुत्ता बन्दर बिल्ली आदि के काटने पर कभी भी नज़र अंदाज़ ना करें और न ही लापरवाही बरतें फ़ौरन उसका ईलाज कराएं या हमसे संम्पर्क करें वर्ना रेबीज़ होने पर जान भी जा सकती है। हमारी सेवा 24 घन्टे है !
याद रहे हमारे यहाँ केवल काशी की थाली ही पढ़कर लगाई जाती हे कोई दवा या झाड़-फूंक नहीँ की जाती है!
रेबीज़ होने के कुछ ये लक्छण हैं जैसे---तेज़ बुखार, तेज़ सर दर्द, गले में ख़राश, पानी न पीना, सुस्त रहना, चीख़ना-चिल्लाना, इधर-उधर भागना, काटने को दौड़ना, बहकी-बहकी बातें करना चिड़चिड़ापन आदि!
नोट- मरीज़ को हड़क यानी (रेबीज़ होने) से पहले-पहले ही हम ईलाज करते हें बाद में कोई ईलाज नहीं करते!
हमारा पता है-
बाक़र हुसैन अन्सारी ग्राम- बग़दाद अन्सार पोस्ट हबीब वाला तहसील धामपुर जिला बिजनोर यूपी 246761
कॉन्टेक्ट तथा व्हाट्सअप नम्बर ये है।
+919917813838 +919927147103

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