पागल कुत्ता, बंदर, बिल्ली, लोमड़ी, गीदड़, लँगूर, साँप, बिच्छु, आदि सभी तरह के ज़हरीले जानवरों के नए व

बुधवार, 28 अक्टूबर 2015

MADARSA FATIMA TUZ ZAHRA

इस्लाम ने तालीम को जो अहमियत दी है वो किसी और मज़हब ने नहीं दी। क़ुरान मजीद की पहली वही और पहली आयत "इक़रा" के ज़रिये अल्लाह पाक ने इन्सानियत को जो हुक्म दिया वो तालीम का हुक्म है। हदीस शरीफ़ में आया है की इल्म हासिल करना हर मर्द व औरत पर फ़र्ज़ है। 
(मुख़्तसिर तआरुफ़) ---- बस्ती बग़दाद अन्सार तहसील धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी की इक मारुफ़ बस्ती है। यहाँ पर ख़ालिस मुसलमानों की तक़रीबन 2000 की आबादी है। इस बस्ती की अवाम तालीमी लिहाज़ से क़रीब 30 फ़ीसद पढ़े-लिखे लोगों पर मुश्तमिल है। और 70 फ़ीसद लोग अनपढ़ हें। और ख़ासकर औरतों / लड़कियों में ना सिर्फ़ दीनी तालीम बल्कि दुन्यावि तालीम भी बिल्कुल ना होने के बराबर है। बन्दा-ऐ-नाचीज़ "बाक़र हुसैन बग़दादी" जोकि इसी बस्ती का रिहायशी है। ने जब अपने अतराफ़ के तालीमी माहौल पर नज़र डाली तो उसे तालीमी मयार बहुत गिरा हुवा नज़र आया। बस उसके दिल में ऐक दर्द व जोश पैदा हुवा और उसने "तालीम सब के लिये" वाले नारे पर अमल करते हुवे खसुसन लड़कियों वे औरतों के लिये अतराफ़ में कोई इदारा ना होने की वजह से ऐक ऐसा इदारा बनाने के लिये सोचा जहाँ पर ना सिर्फ़ लड़कियाँ तालीम हासिल करें बल्कि औरतें भी इस इदारे सेमुस्तफीज़ हों। और जैसा की बुज़ुर्गों से सुना है की "ऐक बच्चे को पढ़ाना सिर्फ़ ऐक को पढ़ाना हे जबकि ऐक लड़की को पढ़ाना पूरे ऐक ख़ानदान को पढ़ाना है"। इसलिए कहा जाता है की "माँ की गोद बच्चे की पहली दर्सगाह है"। बन्दा-ऐ-नाचीज़ ने इन सारे हालात को देखते हुवे अपनी बस्ती में बाक़ायदा ऐक दीनी इदारा "मदरसा फ़ातिमा-तुज़-ज़ाहरा" के नाम से (25 मई सन 2012) से शुरू किया और उसे "अरबी फ़ारसी बोर्ड यूपी" ज़िला बिजनोर से दर्जा 1 से 8 तक मंज़ूर शुदा कराया ताकि बच्चों को क़ुरान-पाक की दीनी तालीम के साथ-साथ दुनिया वी तालीम जैसे- उर्दू, हिन्दी, अंग्रेज़ी, हिसाब, साईन्स और कम्प्यूटर की तालीम भी मिल सके और इस्लाम के बारे में मुस्लिम बच्चों की बेसिक नॉलेज और क़ुरान का नाज़रे के साथ पढ़ना आ सके। हमारा मक़सद उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाना है।
 (इदारे की ख़सूसियात)-----फ़िलहाल इदारा में कमरे ना होने की वजह से इदारा बन्दा-ऐ-नाचीज़ के ख़ाली पड़े दो मंज़िला ईमारत में चल रहा है। मदरसे में फ़िलहाल बस्ती के 100 बच्चे / बच्चियाँ तालीम हासिल कर रहे हें। सभी बच्चों को क़ुरान-पाक नाज़रा के साथ पढ़ाया जाता है। और साथ ही कलिमा, नमाज़, दुवाएँ, अस्माउलहुस्ना, अस्मउलनबी,याद करवाई जाती हें। औरसभी बच्चों की  अख़लाक़ी व इसलाही तरबियत भी की जाती है। और सुन्नतें नब्वी के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने पर ख़ास तवज्जो दी जाती हे। इदारे की तरफ़ से सभी बच्चों, लड़कियों को एक अदद यूनिफॉर्म,मुफ़्त क़ुरान-पाक, सिपारे, क़ायदे, कोर्स भी दिया जाता हे। और ग़रीब, यतीम, व मुस्तहिक़ लड़के/लड़कियों के तमाम तालीमी अख़राजात व इदारे में पढ़ाने वाले सभी टीचरों की तन्खुवाह भी आप  दोस्तों के तआवुन से पूरे किये जाते हें।  (नोट):---- अल्हम्दुलिल्लाह मदरसे की अपनी 2 बीघा ख़ाली पड़ी ज़मीन है। जिसमें 5 कमरे बनाने के लिये तक़रीबन 1500000 लाख रुपया की लागत आयेगी। अहले ख़ैर हज़रात से इदारे की भरपूर जान व माल से तआवुन की अपील है। ताकी जल्द से जल्द ये इदारा बन सके।
Baqar Hussain Ansari Contect & Whatssap No. +919917813838
Madarsa Fatima Tuz Zohra Baghdad Ansar A/C No. 12192191046044 Oriental Bank Of Commerce BRANCH Dhampur District Bijnor State Uttarpradesh India BANK IFSC Cod- ORBCO101219

शनिवार, 24 अक्टूबर 2015

कुत्ता, बन्दर, गीदड़, साँप बिल्ली छिपकली, मधुमख्खी, बिल्ली नेवला सियार रीछ हाथी गिलहरी घोड़ा मेंढक आदि जैसे के नये वे पुराने से पुराने काटने का एकदम मुफ़्त में ईलाज किया जाता है। चाहे ये ज़हरीले जानवर किसी इन्सान या किसी पालतू जानवर जैसे- बकरी, घोड़ा, भैंस, गाये, आदि के ही कियों ने काटे।हम लोग मरीज़ की कमर पर काशी की थाली पढ़कर लगाते हें। अगर ज़ेहर होता हे तो थाली चुम्बक की तरह मरीज़ की कमर पर चिपक जाती है और तब तक नहीँ हटती जब तक मरीज़ के जिस्म से सारा ज़हर ना चूस ले। ये हमारा गारन्टी का 100% पेटेन्ट ईलाज है। मरीज़ को किसी तरह की कोई परेशानी नहीँ होती और मरीज़ आसानी से एक बार में ही पूरी तरह जाता से ठीक हो जाता है। दोबारा आने की ज़रूरत नहीँ होती। अगर आपको या आपके किसी पालतू जानवर को इनमें से कोई भी ज़हरीली चीज़ काट ले तो आप बिना झिझक और बिना डरे हमारे पास चले आयें। किसी बाबा या झाड़-फूँकवाले के चक्कर में आकर अपना वक़्त और पैसा बर्बाद ना करें। हमसे आकर मिलें या हमें फोन पर बतायें इंशाल्लाह आपकी इस तरह की परेशानी का एकदम हल और फ्री ईलाज किया जायेगा।चाहे आप किसी भी राज्य में रहते हों या कहीँ भी काम करते हों हमारे यहाँ आप तक डाक दुवारा या कोरियर से थाली भेजने की भी सुविधा है। आपको केवल थाली और कोरियर का ही पैसा देना होगा बाक़ी किसी तरह का और कोई पैसा नहीँ देना होगा। बस आप हमें अपना पुरा पता बता दीजिये। थाली आपको भेज दी जायेगी।नोट- हमारे यहाँ कुत्ते के काटने पर जो हड़क उठती हे उसके उठने से पहले पहले ही ईलाज किया जाता है। बाद में नहीँ। यानी रैबीज से पहले-पहले हमारा व्हाट्सअप और कॉन्टेक्ट नंबर ये है। +919917813838-+919927147103पता है--- बाक़र हुसैन अंसारी ग्राम बग़दाद अन्सार पोस्ट हबीब वाला तहसील धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी पिन कोड न. 246761 और थाली मंगाने के लिये पैसा भेजने को बैंक खाता नंबर ये है।Baqar Hussain S% Shaukat Ali A/C No. 30999383731 State Bank Of india Branch Dhampur District Bijnor Uttarpradesh IFSC COD- SBINO000633

कुत्ता बन्दर साँप बिल्ली लोमड़ी सियार घोड़ा लोमड़ी ऊँट नेवला लंगूर गीदड़ डिंगारे छिपकली ऊदबिलाउ मेंढक गिलहरी चूहा भेड़िया रीछ बिच्छू बाज़ गिद्ध चील उल्लू आदि के इंसानों व पालतू जानवरों के नये-पुराने काटे हुवे का ईलाज निःशुल्क होता है कोई पैसा या कोई फ़ीस नहीँ ली जाती है ये हमारी एकदम फ़्री सेवा है मरीज़ की कमर पर काशी की थाली पढ़कर लगाई जाती है अगर शरीर में ज़हर होता हे तो थाली कमर पे चुम्बक की तरह चिपक जाती हे और तब तक नही हटती जब तक शरीर से सारा ज़हर न चूस ले थाली से सारा ज़हर एक बार में ही निकल जाता है ओर मरीज़ पूरी तरह से बिल्कुल ठीक हो जाता है ! ये 100 % प्रतिशत गारन्टी का पेटेन्ट ईलाज है। दुबारा आने की ज़रूरत नहीं पड़ती!
 मगर थाली लगवाने के लिये आपको हमारे पास आना पड़ेगा अगर नहीं आ सकते तो घबराने की कोई बात नहीं आप हमसे थाली पढ़वाकर किसी भी देश, या राज्य में डाक दुवारा या कोरियर से भी मंगवा सकते हें आपको केवल थाली व कोरियर आदि का ही ख़र्चा देना पड़ेगा और कोई पैसा नहीँ देना होगा थाली आपको पढ़कर भेज दी जायेगी उसे आप ख़ुद अपनी नंगी कमर पर लगा सकते हें। थाली किसी भी समय दिन या रात को लगा सकते हें। कोई बन्धन नहीँ है।
थाली लगाने का तरीक़ा ये हे पहले आप अपनी कमर को नंगा करलें फिर किसी कुर्सी, मेज़ या चारपाई पर अपने दोनों पैर लटकाकर बैठ जायें और फिर अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और थोड़ा नीचे झुक जायें अब कमर पे सबसे ऊपर की तरफ़ थाली को बिस्मिल्लाह पढ़कर लगाएं और 5 मिनट तक पकड़े रहें ताकी उसे अर्थ मिल जाये और वो गिर न पाये अब थाली को छोड़ दें और देखें की थाली कमर पर चिपकी है या नहीँ अगर हाँ तो धीरे-धीरे कमर को हल्का सा सीधा करें बिलकुल सीधा न हों वर्ना थाली नीचे गिर जायेगी अब आराम से बैठे रहें और जब तक थाली लगे लगायें ज़्यादा हिले-जुले नहीँ थाली गिर ने पर फिर इसी प्रकार से दुबारा लगायें बार-बार गिरने पर ना लगायें क्योंकि अब थाली नहीँ लगेगी आपका ज़हर ख़त्म हो गया है। इसीलिए थाली बार-बार गिर रही है ज़हर ख़त्म होने की यही पहचान है।
हमारी थाली शरीर में ज़हर के कम वे ज़्यादा होने के हिसाब से ही कमर पर चिपकती है आपके शरीर में ज़हर की जितनी अधिक मात्रा होगी ये उतना ही देर तक कमर पे चिपकी रहेगी इसकी कोई लिमिट नहीँ 10 मिन्ट से लेकर 10 घण्टा भी लग सकती है। ज़हर नहीँ होगा तो थाली आपकी कमर पे नहीँ लगेगी !
कुत्ता बन्दर बिल्ली आदि  के काटने पर कभी भी नज़र अंदाज़ ना करें और न ही लापरवाही बरतें फ़ौरन उसका ईलाज कराएं या हमसे संम्पर्क करें वर्ना रेबीज़ होने पर जान भी जा सकती है। हमारी सेवा 24  घन्टे है !
याद रहे हमारे यहाँ केवल काशी की थाली ही पढ़कर लगाई जाती हे कोई दवा या झाड़-फूंक नहीँ की जाती है!
रेबीज़ होने के कुछ ये लक्छण हैं जैसे---तेज़ बुखार, तेज़ सर दर्द, गले में ख़राश, पानी न पीना, सुस्त रहना, चीख़ना-चिल्लाना, इधर-उधर भागना, काटने को दौड़ना, बहकी-बहकी बातें करना चिड़चिड़ापन आदि!
नोट- मरीज़ को हड़क यानी (रेबीज़ होने) से पहले-पहले ही हम ईलाज करते हें बाद में कोई ईलाज नहीं करते!
हमारा पता है-
बाक़र हुसैन अन्सारी ग्राम- बग़दाद अन्सार पोस्ट हबीब वाला तहसील धामपुर जिला बिजनोर यूपी 246761
कॉन्टेक्ट तथा व्हाट्सअप नम्बर ये है। +919917813838 +919927147103

बुधवार, 21 अक्टूबर 2015

कुत्ता, बन्दर, गीदड़, सांप बिल्ली बिच्छु छिपकली, मधुमख्खी, नेवला आदि जैसे ज़हरीले जानवरों के काटने का एकदम मुफ़्त में ईलाज किया जाता है। चाहे ये ज़हरीले जानवर किसी इन्सान या किसी पालतू जानवर जैसे- बकरी, घोड़ा, भैंस, गाये, आदि के ही कियों ने काटे हम लोग मरीज़ की कमर पर काशी की थाली पर क़ुरान की कुछ आयत पढ़कर लगाते हें। अगर ज़ेहर होता हे तो थाली चुम्बक की तरह मरीज़ की कमर पर चिपक जाती है और तब तक नहीँ हटती जब तक मरीज़ के जिस्म से सारा ज़हर ना चूस ले। ना किसी इंजेक्सन् की ज़रूरत ना किसी दवाई की और न ही किसी चीरे की। ये हमारा गारन्टी का 100% पेटेन्ट ईलाज है। मरीज़ को किसी तरह की कोई परेशानी नहीँ होती और मरीज़ आसानी से एक बार में पूरी तरह जाता है से ठीक हो। दोबारा आने की ज़रूरत नहीँ होती। हाँ अगर किसी पालतू जानवर के काटले तो उसे हमारे पास नहीँ लाएं बल्कि ख़ुद ही थाली पढ़वाकर ले जाएं और घर जाकर उस जानवर का कान, टांग, पूँछ पकड़ लें या फिर उसकी कमर पर हाथ रख लें। थाली इंसान की कमर पर ही लगेगी। अगर आपको या आपके किसी पालतू जानवर को इनमें से कोई भी ज़हरीली चीज़ काट ले तो आप बिना झिझक और बिना डरे हमारे पास चले आयें। किसी बाबा या झाड़-फूँकवाले के चक्कर में आकर अपना वक़्त और पैसा बर्बाद ना करें। हमसे आकर मिलें या हमें फोन पर बतायें इंशाल्लाह आपकी इस तरह की परेशानी का एकदमहल और फ्री ईलाज किया जायेगा। हमारा व्हाट्सअप और कॉन्टेक्ट नंबर ये है।+919917813838

कुत्ता बन्दर साँप बिल्ली लोमड़ी सियार घोड़ा लोमड़ी ऊँट नेवला लंगूर गीदड़ डिंगारे छिपकली ऊदबिलाउ मेंढक गिलहरी चूहा भेड़िया रीछ बिच्छू बाज़ गिद्ध चील उल्लू आदि के इंसानों व पालतू जानवरों के नये-पुराने काटे हुवे का ईलाज निःशुल्क होता है कोई पैसा या कोई फ़ीस नहीँ ली जाती है ये हमारी एकदम फ़्री सेवा है मरीज़ की कमर पर काशी की थाली पढ़कर लगाई जाती है अगर शरीर में ज़हर होता हे तो थाली कमर पे चुम्बक की तरह चिपक जाती हे और तब तक नही हटती जब तक शरीर से सारा ज़हर न चूस ले थाली से सारा ज़हर एक बार में ही निकल जाता है ओर मरीज़ पूरी तरह से बिल्कुल ठीक हो जाता है ! ये 100 % प्रतिशत गारन्टी का पेटेन्ट ईलाज है। दुबारा आने की ज़रूरत नहीं पड़ती मगर थाली लगवाने के लिये आपको हमारे पास आना पड़ेगा अगर नहीं आ सकते तो घबराने की कोई बात नहीं आप हमसे थाली पढ़वाकर किसी भी देश, या राज्य में डाक दुवारा या कोरियर से भी मंगवा सकते हें आपको केवल थाली व कोरियर आदि का ही ख़र्चा देना पड़ेगा और कोई पैसा नहीँ देना होगा थाली आपको पढ़कर भेज दी जायेगी उसे आप ख़ुद अपनी नंगी कमर पर लगा सकते हें। थाली किसी भी समय दिन या रात को लगा सकते हें। कोई बन्धन नहीँ है। 
थाली लगाने का तरीक़ा ये हे पहले आप अपनी कमर को नंगा करलें फिर किसी कुर्सी, मेज़ या चारपाई पर अपने दोनों पैर लटकाकर बैठ जायें और फिर अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और थोड़ा नीचे झुक जायें अब कमर पे सबसे ऊपर की तरफ़ थाली को बिस्मिल्लाह पढ़कर लगाएं और 5 मिनट तक पकड़े रहें ताकी उसे अर्थ मिल जाये और वो गिर न पाये अब थाली को छोड़ दें और देखें की थाली कमर पर चिपकी है या नहीँ अगर हाँ तो धीरे-धीरे कमर को हल्का सा सीधा करें बिलकुल सीधा न हों वर्ना थाली नीचे गिर जायेगी अब आराम से बैठे रहें और जब तक थाली लगे लगायें ज़्यादा हिले-जुले नहीँ थाली गिर ने पर फिर इसी प्रकार से दुबारा लगायें बार-बार गिरने पर ना लगायें क्योंकि अब थाली नहीँ लगेगी आपका ज़हर ख़त्म हो गया है। इसीलिए थाली बार-बार गिर रही है। ज़हर ख़त्म होने की यही पहचान है। 
हमारी थाली शरीर में ज़हर के कम वे ज़्यादा होने के हिसाब से ही कमर पर चिपकती है आपके शरीर में ज़हर की जितनी अधिक मात्रा होगी ये उतना ही देर तक कमर पे चिपकी रहेगी इसकी कोई लिमिट नहीँ 10 मिन्ट से लेकर 10 घण्टा या ऐक दिन भी लग सकती है। ज़हर नहीँ होगा तो थाली आपकी कमर पे नहीँ लगेगी फ़ौरन नीचे गिर जायेगी। 
कुत्ता बन्दर बिल्ली आदि  के काटने पर कभी भी नज़र अंदाज़ ना करें और न ही लापरवाही बरतें फ़ौरन उसका ईलाज कराएं या हमसे संम्पर्क करें वर्ना रेबीज़ होने पर जान भी जा सकती है। हम आपकी सेवा के लिए 24 घन्टे तैयार हें 
याद रहे हमारे यहाँ केवल काशी की थाली ही पढ़कर लगाई जाती हे कोई दवा या झाड़-फूंक नहीँ की जाती है
रेबीज़ होने के कुछ ये लक्छण हैं जैसे---तेज़ बुखार, तेज़ सर दर्द, गले में ख़राश, पानी न पीना, सुस्त रहना, चीख़ना-चिल्लाना, इधर-उधर भागना, काटने को दौड़ना, बहकी-बहकी बातें करना आदि!
नोट- मरीज़ को हड़क यानी (रेबीज़ होने) से पहले-पहले ही हम ईलाज करते हें बाद में कोई ईलाज नहीं करते हें। 
हमारा पता है- 
बाक़र हुसैन अन्सारी ग्राम- बग़दाद अन्सार पोस्ट हबीब वाला तहसील धामपुर जिला बिजनोर यूपी 246761
कॉन्टेक्ट तथा व्हाट्सअप नम्बर ये है। 
+919917813838 
+919927147103

रविवार, 18 अक्टूबर 2015

Kutte Ne Kata He IS Bacchee Ko ( Baqar Bijnori +919917813838 )



कुत्ता बन्दर साँप बिल्ली लोमड़ी सियार घोड़ा लोमड़ी ऊँट नेवला लंगूर गीदड़ डिंगारे छिपकली ऊदबिलाउ मेंढक गिलहरी चूहा भेड़िया रीछ बिच्छू बाज़ गिद्ध चील उल्लू आदि के इंसानों व पालतू जानवरों के नये-पुराने काटे हुवे का ईलाज निःशुल्क होता है कोई पैसा या कोई फ़ीस नहीँ ली जाती है ये हमारी एकदम फ़्री सेवा है मरीज़ की कमर पर काशी की थाली पढ़कर लगाई जाती है अगर शरीर में ज़हर होता हे तो थाली कमर पे चुम्बक की तरह चिपक जाती हे और तब तक नही हटती जब तक शरीर से सारा ज़हर न चूस ले थाली से सारा ज़हर एक बार में ही निकल जाता है ओर मरीज़ पूरी तरह से बिल्कुल ठीक हो जाता है ! ये 100 % प्रतिशत गारन्टी का पेटेन्ट ईलाज है। दुबारा आने की ज़रूरत नहीं पड़ती!
 मगर थाली लगवाने के लिये आपको हमारे पास आना पड़ेगा अगर नहीं आ सकते तो घबराने की कोई बात नहीं आप हमसे थाली पढ़वाकर किसी भी देश, या राज्य में डाक दुवारा या कोरियर से भी मंगवा सकते हें आपको केवल थाली व कोरियर आदि का ही ख़र्चा देना पड़ेगा और कोई पैसा नहीँ देना होगा थाली आपको पढ़कर भेज दी जायेगी उसे आप ख़ुद अपनी नंगी कमर पर लगा सकते हें। थाली किसी भी समय दिन या रात को लगा सकते हें। कोई बन्धन नहीँ है।
थाली लगाने का तरीक़ा ये हे पहले आप अपनी कमर को नंगा करलें फिर किसी कुर्सी, मेज़ या चारपाई पर अपने दोनों पैर लटकाकर बैठ जायें और फिर अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और थोड़ा नीचे झुक जायें अब कमर पे सबसे ऊपर की तरफ़ थाली को बिस्मिल्लाह पढ़कर लगाएं और 5 मिनट तक पकड़े रहें ताकी उसे अर्थ मिल जाये और वो गिर न पाये अब थाली को छोड़ दें और देखें की थाली कमर पर चिपकी है या नहीँ अगर हाँ तो धीरे-धीरे कमर को हल्का सा सीधा करें बिलकुल सीधा न हों वर्ना थाली नीचे गिर जायेगी अब आराम से बैठे रहें और जब तक थाली लगे लगायें ज़्यादा हिले-जुले नहीँ थाली गिर ने पर फिर इसी प्रकार से दुबारा लगायें बार-बार गिरने पर ना लगायें क्योंकि अब थाली नहीँ लगेगी आपका ज़हर ख़त्म हो गया है। इसीलिए थाली बार-बार गिर रही है ज़हर ख़त्म होने की यही पहचान है।
हमारी थाली शरीर में ज़हर के कम वे ज़्यादा होने के हिसाब से ही कमर पर चिपकती है आपके शरीर में ज़हर की जितनी अधिक मात्रा होगी ये उतना ही देर तक कमर पे चिपकी रहेगी इसकी कोई लिमिट नहीँ 10 मिन्ट से लेकर 10 घण्टा भी लग सकती है। ज़हर नहीँ होगा तो थाली आपकी कमर पे नहीँ लगेगी !
कुत्ता बन्दर बिल्ली आदि  के काटने पर कभी भी नज़र अंदाज़ ना करें और न ही लापरवाही बरतें फ़ौरन उसका ईलाज कराएं या हमसे संम्पर्क करें वर्ना रेबीज़ होने पर जान भी जा सकती है। हमारी सेवा 24  घन्टे है !
याद रहे हमारे यहाँ केवल काशी की थाली ही पढ़कर लगाई जाती हे कोई दवा या झाड़-फूंक नहीँ की जाती है!
रेबीज़ होने के कुछ ये लक्छण हैं जैसे---तेज़ बुखार, तेज़ सर दर्द, गले में ख़राश, पानी न पीना, सुस्त रहना, चीख़ना-चिल्लाना, इधर-उधर भागना, काटने को दौड़ना, बहकी-बहकी बातें करना चिड़चिड़ापन आदि!
नोट- मरीज़ को हड़क यानी (रेबीज़ होने) से पहले-पहले ही हम ईलाज करते हें बाद में कोई ईलाज नहीं करते!
हमारा पता है-
बाक़र हुसैन अन्सारी ग्राम- बग़दाद अन्सार पोस्ट हबीब वाला तहसील धामपुर जिला बिजनोर यूपी 246761
कॉन्टेक्ट तथा व्हाट्सअप नम्बर ये है। +919917813838 +919927147103

सोमवार, 12 अक्टूबर 2015

मदरसा फ़ातिमा तुज़ ज़ाहरा धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी

इस्लाम ने तालीम को जो अहमियत दी है वो किसी और मज़हब ने नहीं दी। क़ुरान मजीद की पहली वही और पहली आयत "इक़रा" के ज़रिये अल्लाह पाक ने इन्सानियत को जो हुक्म दिया वो तालीम का हुक्म है। हदीस शरीफ़ में आया है की इल्म हासिल करना हर मर्द व औरत पर फ़र्ज़ है। 
(मुख़्तसिर तआरुफ़) ---- बस्ती बग़दाद अन्सार तहसील धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी की इक मारुफ़ बस्ती है। यहाँ पर ख़ालिस मुसलमानों की तक़रीबन 2000 की आबादी है। इस बस्ती की अवाम तालीमी लिहाज़ से क़रीब 30 फ़ीसद पढ़े-लिखे लोगों पर मुश्तमिल है। और 70 फ़ीसद लोग अनपढ़ हें। और ख़ासकर औरतों / लड़कियों में ना सिर्फ़ दीनी तालीम बल्कि दुन्यावि तालीम भी बिल्कुल ना होने के बराबर है। बन्दा-ऐ-नाचीज़ "बाक़र हुसैन बग़दादी" जोकि इसी बस्ती का रिहायशी है। ने जब अपने अतराफ़ के तालीमी माहौल पर नज़र डाली तो उसे तालीमी मयार बहुत गिरा हुवा नज़र आया। बस उसके दिल में ऐक दर्द व जोश पैदा हुवा और उसने "तालीम सब के लिये" वाले नारे पर अमल करते हुवे खसुसन लड़कियों वे औरतों के लिये अतराफ़ में कोई इदारा ना होने की वजह से ऐक ऐसा इदारा बनाने के लिये सोचा जहाँ पर ना सिर्फ़ लड़कियाँ तालीम हासिल करें बल्कि औरतें भी इस इदारे सेमुस्तफीज़ हों। और जैसा की बुज़ुर्गों से सुना है की "ऐक बच्चे को पढ़ाना सिर्फ़ ऐक को पढ़ाना हे जबकि ऐक लड़की को पढ़ाना पूरे ऐक ख़ानदान को पढ़ाना है"। इसलिए कहा जाता है की "माँ की गोद बच्चे की पहली दर्सगाह है"। बन्दा-ऐ-नाचीज़ ने इन सारे हालात को देखते हुवे अपनी बस्ती में बाक़ायदा ऐक दीनी इदारा "मदरसा फ़ातिमा-तुज़-ज़ाहरा" के नाम से (25 मई सन 2012) से शुरू किया और उसे "अरबी फ़ारसी बोर्ड यूपी" ज़िला बिजनोर से दर्जा 1 से 8 तक मंज़ूर शुदा कराया ताकि बच्चों को क़ुरान-पाक की दीनी तालीम के साथ-साथ दुनिया वी तालीम जैसे- उर्दू, हिन्दी, अंग्रेज़ी, हिसाब, साईन्स और कम्प्यूटर की तालीम भी मिल सके और इस्लाम के बारे में मुस्लिम बच्चों की बेसिक नॉलेज और क़ुरान का नाज़रे के साथ पढ़ना आ सके। हमारा मक़सद उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाना है।
 (इदारे की ख़सूसियात)-----फ़िलहाल इदारा में कमरे ना होने की वजह से इदारा बन्दा-ऐ-नाचीज़ के ख़ाली पड़े दो मंज़िला ईमारत में चल रहा है। मदरसे में फ़िलहाल बस्ती के 100 बच्चे / बच्चियाँ तालीम हासिल कर रहे हें। सभी बच्चों को क़ुरान-पाक नाज़रा के साथ पढ़ाया जाता है। और साथ ही कलिमा, नमाज़, दुवाएँ, अस्माउलहुस्ना, अस्मउलनबी,याद करवाई जाती हें। औरसभी बच्चों की  अख़लाक़ी व इसलाही तरबियत भी की जाती है। और सुन्नतें नब्वी के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने पर ख़ास तवज्जो दी जाती हे। इदारे की तरफ़ से सभी बच्चों, लड़कियों को एक अदद यूनिफॉर्म,मुफ़्त क़ुरान-पाक, सिपारे, क़ायदे, कोर्स भी दिया जाता हे। और ग़रीब, यतीम, व मुस्तहिक़ लड़के/लड़कियों के तमाम तालीमी अख़राजात व इदारे में पढ़ाने वाले सभी टीचरों की तन्खुवाह भी आप  दोस्तों के तआवुन से पूरे किये जाते हें। 
 (नोट):---- अल्हम्दुलिल्लाह मदरसे की अपनी 2 बीघा ख़ाली पड़ी ज़मीन है। जिसमें 5 कमरे बनाने के लिये तक़रीबन 1500000 लाख रुपया की लागत आयेगी। अहले ख़ैर हज़रात से इदारे की भरपूर जान व माल से तआवुन की अपील है। ताकी जल्द से जल्द ये इदारा बन सके।
Madarsa Fatima Tuz Zohra Baghdad Ansar A/C No. 12192191046044 Oriental Bank Of Commerce BRANCH Dhampur District Bijnor State Uttarpradesh India BANK IFSC Cod- ORBCO101219





शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015

मदरसा फ़ातिमा तुज़ ज़ाहरा बग़दाद अंसार धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी

इस्लाम ने तालीम को जो अहमियत दी है वो किसी और मज़हब ने नहीं दी। क़ुरान मजीद की पहली वही और पहली आयत "इक़रा" के ज़रिये अल्लाह पाक ने इन्सानियत को जो हुक्म दिया वो तालीम का हुक्म है। हदीस शरीफ़ में आया है की इल्म हासिल करना हर मर्द व औरत पर फ़र्ज़ है। 
(मुख़्तसिर तआरुफ़) ---- बस्ती बग़दाद अन्सार तहसील धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी की इक मारुफ़ बस्ती है। यहाँ पर ख़ालिस मुसलमानों की तक़रीबन 2000 की आबादी है। इस बस्ती की अवाम तालीमी लिहाज़ से क़रीब 30 फ़ीसद पढ़े-लिखे लोगों पर मुश्तमिल है। और 70 फ़ीसद लोग अनपढ़ हें। और ख़ासकर औरतों / लड़कियों में ना सिर्फ़ दीनी तालीम बल्कि दुन्यावि तालीम भी बिल्कुल ना होने के बराबर है। बन्दा-ऐ-नाचीज़ "बाक़र हुसैन बग़दादी" जोकि इसी बस्ती का रिहायशी है। ने जब अपने अतराफ़ के तालीमी माहौल पर नज़र डाली तो उसे तालीमी मयार बहुत गिरा हुवा नज़र आया। बस उसके दिल में ऐक दर्द व जोश पैदा हुवा और उसने "तालीम सब के लिये" वाले नारे पर अमल करते हुवे खसुसन लड़कियों वे औरतों के लिये अतराफ़ में कोई इदारा ना होने की वजह से ऐक ऐसा इदारा बनाने के लिये सोचा जहाँ पर ना सिर्फ़ लड़कियाँ तालीम हासिल करें बल्कि औरतें भी इस इदारे सेमुस्तफीज़ हों। और जैसा की बुज़ुर्गों से सुना है की "ऐक बच्चे को पढ़ाना सिर्फ़ ऐक को पढ़ाना हे जबकि ऐक लड़की को पढ़ाना पूरे ऐक ख़ानदान को पढ़ाना है"। इसलिए कहा जाता है की "माँ की गोद बच्चे की पहली दर्सगाह है"। बन्दा-ऐ-नाचीज़ ने इन सारे हालात को देखते हुवे अपनी बस्ती में बाक़ायदा ऐक दीनी इदारा "मदरसा फ़ातिमा-तुज़-ज़ाहरा" के नाम से (25 मई सन 2012) से शुरू किया और उसे "अरबी फ़ारसी बोर्ड यूपी" ज़िला बिजनोर से दर्जा 1 से 8 तक मंज़ूर शुदा कराया ताकि बच्चों को क़ुरान-पाक की दीनी तालीम के साथ-साथ दुनिया वी तालीम जैसे- उर्दू, हिन्दी, अंग्रेज़ी, हिसाब, साईन्स और कम्प्यूटर की तालीम भी मिल सके और इस्लाम के बारे में मुस्लिम बच्चों की बेसिक नॉलेज और क़ुरान का नाज़रे के साथ पढ़ना आ सके। हमारा मक़सद उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाना है।
 (इदारे की ख़सूसियात)-----फ़िलहाल इदारा में कमरे ना होने की वजह से इदारा बन्दा-ऐ-नाचीज़ के ख़ाली पड़े दो मंज़िला ईमारत में चल रहा है। मदरसे में फ़िलहाल बस्ती के 100 बच्चे / बच्चियाँ तालीम हासिल कर रहे हें। सभी बच्चों को क़ुरान-पाक नाज़रा के साथ पढ़ाया जाता है। और साथ ही कलिमा, नमाज़, दुवाएँ, अस्माउलहुस्ना, अस्मउलनबी,याद करवाई जाती हें। औरसभी बच्चों की  अख़लाक़ी व इसलाही तरबियत भी की जाती है। और सुन्नतें नब्वी के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने पर ख़ास तवज्जो दी जाती हे। इदारे की तरफ़ से सभी बच्चों, लड़कियों को एक अदद यूनिफॉर्म,मुफ़्त क़ुरान-पाक, सिपारे, क़ायदे, कोर्स भी दिया जाता हे। और ग़रीब, यतीम, व मुस्तहिक़ लड़के/लड़कियों के तमाम तालीमी अख़राजात व इदारे में पढ़ाने वाले सभी टीचरों की तन्खुवाह भी आप  दोस्तों के तआवुन से पूरे किये जाते हें। 
 (नोट):---- अल्हम्दुलिल्लाह मदरसे की अपनी 2 बीघा ख़ाली पड़ी ज़मीन है। जिसमें 5 कमरे बनाने के लिये तक़रीबन 1500000 लाख रुपया की लागत आयेगी। अहले ख़ैर हज़रात से इदारे की भरपूर जान व माल से तआवुन की अपील है। ताकी जल्द से जल्द ये इदारा बन सके।
Madarsa Fatima Tuz Zohra Baghdad Ansar A/C No. 12192191046044 Oriental Bank Of Commerce BRANCH Dhampur District Bijnor State Uttarpradesh India BANK IFSC Cod- ORBCO101219


Kutte Ne Kata is Bacchee Ke Pait Par ( Baqar Bijnori+919917813838 )


कुत्ता बन्दर साँप बिल्ली लोमड़ी सियार घोड़ा लोमड़ी ऊँट नेवला लंगूर गीदड़ डिंगारे छिपकली ऊदबिलाउ मेंढक गिलहरी चूहा भेड़िया रीछ बिच्छू बाज़ गिद्ध चील उल्लू आदि के इंसानों व पालतू जानवरों के नये-पुराने काटे हुवे का ईलाज निःशुल्क होता है कोई पैसा या कोई फ़ीस नहीँ ली जाती है ये हमारी एकदम फ़्री सेवा है मरीज़ की कमर पर काशी की थाली पढ़कर लगाई जाती है अगर शरीर में ज़हर होता हे तो थाली कमर पे चुम्बक की तरह चिपक जाती हे और तब तक नही हटती जब तक शरीर से सारा ज़हर न चूस ले थाली से सारा ज़हर एक बार में ही निकल जाता है ओर मरीज़ पूरी तरह से बिल्कुल ठीक हो जाता है ! ये 100 % प्रतिशत गारन्टी का पेटेन्ट ईलाज है। दुबारा आने की ज़रूरत नहीं पड़ती!
 मगर थाली लगवाने के लिये आपको हमारे पास आना पड़ेगा अगर नहीं आ सकते तो घबराने की कोई बात नहीं आप हमसे थाली पढ़वाकर किसी भी देश, या राज्य में डाक दुवारा या कोरियर से भी मंगवा सकते हें आपको केवल थाली व कोरियर आदि का ही ख़र्चा देना पड़ेगा और कोई पैसा नहीँ देना होगा थाली आपको पढ़कर भेज दी जायेगी उसे आप ख़ुद अपनी नंगी कमर पर लगा सकते हें। थाली किसी भी समय दिन या रात को लगा सकते हें। कोई बन्धन नहीँ है।
थाली लगाने का तरीक़ा ये हे पहले आप अपनी कमर को नंगा करलें फिर किसी कुर्सी, मेज़ या चारपाई पर अपने दोनों पैर लटकाकर बैठ जायें और फिर अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और थोड़ा नीचे झुक जायें अब कमर पे सबसे ऊपर की तरफ़ थाली को बिस्मिल्लाह पढ़कर लगाएं और 5 मिनट तक पकड़े रहें ताकी उसे अर्थ मिल जाये और वो गिर न पाये अब थाली को छोड़ दें और देखें की थाली कमर पर चिपकी है या नहीँ अगर हाँ तो धीरे-धीरे कमर को हल्का सा सीधा करें बिलकुल सीधा न हों वर्ना थाली नीचे गिर जायेगी अब आराम से बैठे रहें और जब तक थाली लगे लगायें ज़्यादा हिले-जुले नहीँ थाली गिर ने पर फिर इसी प्रकार से दुबारा लगायें बार-बार गिरने पर ना लगायें क्योंकि अब थाली नहीँ लगेगी आपका ज़हर ख़त्म हो गया है। इसीलिए थाली बार-बार गिर रही है ज़हर ख़त्म होने की यही पहचान है।
हमारी थाली शरीर में ज़हर के कम वे ज़्यादा होने के हिसाब से ही कमर पर चिपकती है आपके शरीर में ज़हर की जितनी अधिक मात्रा होगी ये उतना ही देर तक कमर पे चिपकी रहेगी इसकी कोई लिमिट नहीँ 10 मिन्ट से लेकर 10 घण्टा भी लग सकती है। ज़हर नहीँ होगा तो थाली आपकी कमर पे नहीँ लगेगी !
कुत्ता बन्दर बिल्ली आदि  के काटने पर कभी भी नज़र अंदाज़ ना करें और न ही लापरवाही बरतें फ़ौरन उसका ईलाज कराएं या हमसे संम्पर्क करें वर्ना रेबीज़ होने पर जान भी जा सकती है। हमारी सेवा 24  घन्टे है !
याद रहे हमारे यहाँ केवल काशी की थाली ही पढ़कर लगाई जाती हे कोई दवा या झाड़-फूंक नहीँ की जाती है!
रेबीज़ होने के कुछ ये लक्छण हैं जैसे---तेज़ बुखार, तेज़ सर दर्द, गले में ख़राश, पानी न पीना, सुस्त रहना, चीख़ना-चिल्लाना, इधर-उधर भागना, काटने को दौड़ना, बहकी-बहकी बातें करना चिड़चिड़ापन आदि!
नोट- मरीज़ को हड़क यानी (रेबीज़ होने) से पहले-पहले ही हम ईलाज करते हें बाद में कोई ईलाज नहीं करते!
हमारा पता है-
बाक़र हुसैन अन्सारी ग्राम- बग़दाद अन्सार पोस्ट हबीब वाला तहसील धामपुर जिला बिजनोर यूपी 246761
कॉन्टेक्ट तथा व्हाट्सअप नम्बर ये है। +919917813838 +919927147103

पागल कुत्ते के काटने का ईलाज

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