इस्लाम ने तालीम को जो अहमियत दी है वो किसी और मज़हब ने नहीं दी। क़ुरान मजीद की पहली वही और पहली आयत "इक़रा" के ज़रिये अल्लाह पाक ने इन्सानियत को जो हुक्म दिया वो तालीम का हुक्म है। हदीस शरीफ़ में आया है की इल्म हासिल करना हर मर्द व औरत पर फ़र्ज़ है।
(मुख़्तसिर तआरुफ़) ---- बस्ती बग़दाद अन्सार तहसील धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी की इक मारुफ़ बस्ती है। यहाँ पर ख़ालिस मुसलमानों की तक़रीबन 2000 की आबादी है। इस बस्ती की अवाम तालीमी लिहाज़ से क़रीब 30 फ़ीसद पढ़े-लिखे लोगों पर मुश्तमिल है। और 70 फ़ीसद लोग अनपढ़ हें। और ख़ासकर औरतों / लड़कियों में ना सिर्फ़ दीनी तालीम बल्कि दुन्यावि तालीम भी बिल्कुल ना होने के बराबर है। बन्दा-ऐ-नाचीज़ "बाक़र हुसैन बग़दादी" जोकि इसी बस्ती का रिहायशी है। ने जब अपने अतराफ़ के तालीमी माहौल पर नज़र डाली तो उसे तालीमी मयार बहुत गिरा हुवा नज़र आया। बस उसके दिल में ऐक दर्द व जोश पैदा हुवा और उसने "तालीम सब के लिये" वाले नारे पर अमल करते हुवे खसुसन लड़कियों वे औरतों के लिये अतराफ़ में कोई इदारा ना होने की वजह से ऐक ऐसा इदारा बनाने के लिये सोचा जहाँ पर ना सिर्फ़ लड़कियाँ तालीम हासिल करें बल्कि औरतें भी इस इदारे सेमुस्तफीज़ हों। और जैसा की बुज़ुर्गों से सुना है की "ऐक बच्चे को पढ़ाना सिर्फ़ ऐक को पढ़ाना हे जबकि ऐक लड़की को पढ़ाना पूरे ऐक ख़ानदान को पढ़ाना है"। इसलिए कहा जाता है की "माँ की गोद बच्चे की पहली दर्सगाह है"। बन्दा-ऐ-नाचीज़ ने इन सारे हालात को देखते हुवे अपनी बस्ती में बाक़ायदा ऐक दीनी इदारा "मदरसा फ़ातिमा-तुज़-ज़ाहरा" के नाम से (25 मई सन 2012) से शुरू किया और उसे "अरबी फ़ारसी बोर्ड यूपी" ज़िला बिजनोर से दर्जा 1 से 8 तक मंज़ूर शुदा कराया ताकि बच्चों को क़ुरान-पाक की दीनी तालीम के साथ-साथ दुनिया वी तालीम जैसे- उर्दू, हिन्दी, अंग्रेज़ी, हिसाब, साईन्स और कम्प्यूटर की तालीम भी मिल सके और इस्लाम के बारे में मुस्लिम बच्चों की बेसिक नॉलेज और क़ुरान का नाज़रे के साथ पढ़ना आ सके। हमारा मक़सद उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाना है।
(इदारे की ख़सूसियात)-----फ़िलहाल इदारा में कमरे ना होने की वजह से इदारा बन्दा-ऐ-नाचीज़ के ख़ाली पड़े दो मंज़िला ईमारत में चल रहा है। मदरसे में फ़िलहाल बस्ती के 100 बच्चे / बच्चियाँ तालीम हासिल कर रहे हें। सभी बच्चों को क़ुरान-पाक नाज़रा के साथ पढ़ाया जाता है। और साथ ही कलिमा, नमाज़, दुवाएँ, अस्माउलहुस्ना, अस्मउलनबी,याद करवाई जाती हें। औरसभी बच्चों की अख़लाक़ी व इसलाही तरबियत भी की जाती है। और सुन्नतें नब्वी के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने पर ख़ास तवज्जो दी जाती हे। इदारे की तरफ़ से सभी बच्चों, लड़कियों को एक अदद यूनिफॉर्म,मुफ़्त क़ुरान-पाक, सिपारे, क़ायदे, कोर्स भी दिया जाता हे। और ग़रीब, यतीम, व मुस्तहिक़ लड़के/लड़कियों के तमाम तालीमी अख़राजात व इदारे में पढ़ाने वाले सभी टीचरों की तन्खुवाह भी आप दोस्तों के तआवुन से पूरे किये जाते हें।
(नोट):---- अल्हम्दुलिल्लाह मदरसे की अपनी 2 बीघा ख़ाली पड़ी ज़मीन है। जिसमें 5 कमरे बनाने के लिये तक़रीबन 1500000 लाख रुपया की लागत आयेगी। अहले ख़ैर हज़रात से इदारे की भरपूर जान व माल से तआवुन की अपील है। ताकी जल्द से जल्द ये इदारा बन सके।
Madarsa Fatima Tuz Zohra Baghdad Ansar A/C No. 12192191046044 Oriental Bank Of Commerce BRANCH Dhampur District Bijnor State Uttarpradesh India BANK IFSC Cod- ORBCO101219
(मुख़्तसिर तआरुफ़) ---- बस्ती बग़दाद अन्सार तहसील धामपुर ज़िला बिजनोर यूपी की इक मारुफ़ बस्ती है। यहाँ पर ख़ालिस मुसलमानों की तक़रीबन 2000 की आबादी है। इस बस्ती की अवाम तालीमी लिहाज़ से क़रीब 30 फ़ीसद पढ़े-लिखे लोगों पर मुश्तमिल है। और 70 फ़ीसद लोग अनपढ़ हें। और ख़ासकर औरतों / लड़कियों में ना सिर्फ़ दीनी तालीम बल्कि दुन्यावि तालीम भी बिल्कुल ना होने के बराबर है। बन्दा-ऐ-नाचीज़ "बाक़र हुसैन बग़दादी" जोकि इसी बस्ती का रिहायशी है। ने जब अपने अतराफ़ के तालीमी माहौल पर नज़र डाली तो उसे तालीमी मयार बहुत गिरा हुवा नज़र आया। बस उसके दिल में ऐक दर्द व जोश पैदा हुवा और उसने "तालीम सब के लिये" वाले नारे पर अमल करते हुवे खसुसन लड़कियों वे औरतों के लिये अतराफ़ में कोई इदारा ना होने की वजह से ऐक ऐसा इदारा बनाने के लिये सोचा जहाँ पर ना सिर्फ़ लड़कियाँ तालीम हासिल करें बल्कि औरतें भी इस इदारे सेमुस्तफीज़ हों। और जैसा की बुज़ुर्गों से सुना है की "ऐक बच्चे को पढ़ाना सिर्फ़ ऐक को पढ़ाना हे जबकि ऐक लड़की को पढ़ाना पूरे ऐक ख़ानदान को पढ़ाना है"। इसलिए कहा जाता है की "माँ की गोद बच्चे की पहली दर्सगाह है"। बन्दा-ऐ-नाचीज़ ने इन सारे हालात को देखते हुवे अपनी बस्ती में बाक़ायदा ऐक दीनी इदारा "मदरसा फ़ातिमा-तुज़-ज़ाहरा" के नाम से (25 मई सन 2012) से शुरू किया और उसे "अरबी फ़ारसी बोर्ड यूपी" ज़िला बिजनोर से दर्जा 1 से 8 तक मंज़ूर शुदा कराया ताकि बच्चों को क़ुरान-पाक की दीनी तालीम के साथ-साथ दुनिया वी तालीम जैसे- उर्दू, हिन्दी, अंग्रेज़ी, हिसाब, साईन्स और कम्प्यूटर की तालीम भी मिल सके और इस्लाम के बारे में मुस्लिम बच्चों की बेसिक नॉलेज और क़ुरान का नाज़रे के साथ पढ़ना आ सके। हमारा मक़सद उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाना है।
(इदारे की ख़सूसियात)-----फ़िलहाल इदारा में कमरे ना होने की वजह से इदारा बन्दा-ऐ-नाचीज़ के ख़ाली पड़े दो मंज़िला ईमारत में चल रहा है। मदरसे में फ़िलहाल बस्ती के 100 बच्चे / बच्चियाँ तालीम हासिल कर रहे हें। सभी बच्चों को क़ुरान-पाक नाज़रा के साथ पढ़ाया जाता है। और साथ ही कलिमा, नमाज़, दुवाएँ, अस्माउलहुस्ना, अस्मउलनबी,याद करवाई जाती हें। औरसभी बच्चों की अख़लाक़ी व इसलाही तरबियत भी की जाती है। और सुन्नतें नब्वी के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने पर ख़ास तवज्जो दी जाती हे। इदारे की तरफ़ से सभी बच्चों, लड़कियों को एक अदद यूनिफॉर्म,मुफ़्त क़ुरान-पाक, सिपारे, क़ायदे, कोर्स भी दिया जाता हे। और ग़रीब, यतीम, व मुस्तहिक़ लड़के/लड़कियों के तमाम तालीमी अख़राजात व इदारे में पढ़ाने वाले सभी टीचरों की तन्खुवाह भी आप दोस्तों के तआवुन से पूरे किये जाते हें।
(नोट):---- अल्हम्दुलिल्लाह मदरसे की अपनी 2 बीघा ख़ाली पड़ी ज़मीन है। जिसमें 5 कमरे बनाने के लिये तक़रीबन 1500000 लाख रुपया की लागत आयेगी। अहले ख़ैर हज़रात से इदारे की भरपूर जान व माल से तआवुन की अपील है। ताकी जल्द से जल्द ये इदारा बन सके।
Madarsa Fatima Tuz Zohra Baghdad Ansar A/C No. 12192191046044 Oriental Bank Of Commerce BRANCH Dhampur District Bijnor State Uttarpradesh India BANK IFSC Cod- ORBCO101219





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